विदेश से MBBS करने का सपना? कदम बढ़ाने से पहले इन 5 बातों का रखें खास ख्याल नई दिल्ली: हर साल भारत में लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना दे...
विदेश से MBBS करने का सपना? कदम बढ़ाने से पहले इन 5 बातों का रखें खास ख्याल
नई दिल्ली: हर साल भारत में लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन NEET में कड़ी प्रतिस्पर्धा और देश के प्राइवेट कॉलेजों की भारी-भरकम फीस के कारण कई छात्र विदेशों का रुख करते हैं। रूस, स्पेन, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में मेडिकल की पढ़ाई के कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं।
परंतु, विदेश जाकर MBBS की पढ़ाई करना जितना रोमांचक है, उतना ही जिम्मेदारी भरा भी है। एक गलत फैसला आपके पूरे करियर और लाखों रुपये को दांव पर लगा सकता है। GPC World (2003 से शिक्षा और करियर परामर्श में अग्रणी) के विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल की पढ़ाई के लिए आवेदन करने से पहले छात्रों और अभिभावकों को निम्नलिखित 5 मुख्य बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
1. NMC की गाइडलाइंस (NMC Rules & Regulations)
सबसे जरूरी और पहला कदम है नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों को समझना। अगर आप विदेश से पढ़ाई पूरी करके भारत में प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो आपकी यूनिवर्सिटी को NMC के FMGL (Foreign Medical Graduate Licensure) Regulations को पूरा करना होगा।
कोर्स की अवधि कम से कम 54 महीने (4.5 साल) होनी चाहिए।
इसके साथ ही उसी देश में 12 महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य है।
पूरी पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी (English Medium) होना चाहिए।
2. यूनिवर्सिटी की मान्यता और इतिहास
केवल आकर्षक विज्ञापनों या कम फीस को देखकर कॉलेज न चुनें। जिस भी देश में आप जा रहे हैं, वहां की यूनिवर्सिटी को उस देश की सरकार और WHO (World Health Organization) से मान्यता प्राप्त होनी चाहिए। हमेशा ऐसी यूनिवर्सिटीज को प्राथमिकता दें जिनका इतिहास कम से कम 20-30 साल पुराना हो और जहां पहले से भारतीय छात्र पढ़ रहे हों।
3. उस देश का 'लाइसेंसिंग एग्जाम' नियम
NMC के नए नियमों के मुताबिक, आप जिस देश से MBBS कर रहे हैं, वहां आपको डॉक्टर के रूप में रजिस्टर होने या प्रैक्टिस करने का कानूनी अधिकार (License) मिलना चाहिए। कुछ देश विदेशियों को यह लाइसेंस आसानी से नहीं देते। इसलिए एडमिशन से पहले यह जरूर कन्फर्म करें कि डिग्री पूरी होने के बाद क्या आप वहां की नेशनल मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर होने के पात्र हैं या नहीं।
4. बजट और छिपे हुए खर्चे (Hidden Costs)
विदेश में पढ़ाई का बजट बनाते समय केवल ट्यूशन फीस न देखें। हॉस्टल का खर्च, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा रिन्यूअल फीस, सालाना हवाई टिकट और वहां रहने-खाने का मासिक खर्च (Cost of Living) भी बजट में जोड़ें। कई बार शुरुआती पैकेज में ये खर्चे नहीं दिखाए जाते, जिससे बाद में आर्थिक परेशानी हो सकती है।
5. भाषा और क्लिनिकल एक्सपोजर (Clinical Exposure)
भले ही आपकी पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी हो, लेकिन जब आप इंटर्नशिप के दौरान अस्पतालों में मरीजों (Patients) से मिलेंगे, तो आपको वहां की स्थानीय भाषा (जैसे रूसी, स्पैनिश या जर्मन) बोलनी पड़ेगी। इसलिए यह जांच लें कि क्या यूनिवर्सिटी अपने सिलेबस में शुरुआती सालों से ही स्थानीय भाषा सिखाती है या नहीं। अच्छा क्लिनिकल एक्सपोजर ही आपको एक कुशल डॉक्टर बनाएगा।
GPC World का सुझाव: विदेश में MBBS चुनना आपके भविष्य का सबसे बड़ा निवेश है। किसी भी एजेंट के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय खुद यूनिवर्सिटी की वेबसाइट चेक करें या किसी प्रामाणिक और अनुभवी करियर काउंसलर की मदद लें।
GPC World 'इंडिया + ग्लोबल' पहल के तहत छात्रों को देश के साथ-साथ विदेश में सुरक्षित और सही मेडिकल कॉलेजों के चयन के लिए पूरी काउंसलिंग और पारदर्शी गाइडेंस प्रदान करता है। अपनी योग्यता और बजट के अनुसार सही विकल्प चुनने के लिए आज ही हमारे एक्सपर्ट्स से संपर्क करें।

